अर्थ ढूढ़ रहा हूँ

अर्थ ढूढ़ रहा हूँ

करवट बदलते जीवन को-
एक पल रोक कर मैंने पूछा,
इस जीवन का अर्थ क्या है –
क्यों हम सुख दुःख महसूस करते है,
किस और बढ रहा है ये जीवन-
उफनती बहती नदी की धारा,
क्यों नहीं रूकती-
सनसनाती हवा क्या कहती है ,
सागर में उठती लहरों का भी-
मन शांत हुआ नहीं,
रुके हुए पलों ने-
और ठहरे जीवनने,
नकार दिया मेरे प्रश्न को –
कहा अर्थ संभव नहीं,
शांत पलो ने आवाज दी मन को-
क्या परिभाषित कर पाओगे,
जीवन के अर्थ को-
जहाँ बदलता है हर पल जीवन,
और जीवन का अर्थ-
अर्थ को मन है,
तो जी लो एक ही पल को पूर्णतया.
अगर नहीं तो खो जाओ,
इस बहतीजीवन धारा में ।।