Daily Inspirations – 28.July.2018

Daily Inspiration from Babaji in Hindi, followed by the English translation. Sairam.

शून्यता लानी है। शुद्धता नही।मुझसे अगर पूछो तो, मै कहूगां शून्यता ही एक मात्र शुद्धता है।और जहाँ तक मन हैं वहाँ तक कहीं न कहीं अशुद्धता रहेगी! मन है क्या, मन यानी भरा हुआ, मन है क्या विचार,वासना,कल्पना। अतीत भविष्य, बेचैनी, विडम्बना, प्रश्नों का ढेर ।वेवुझ पहेलियाँ, “मन है क्या” सब तरह के झंझालो का नाम “मन” है।इसको कैसे विशुद्ध करोगे। पर “हाँ” इसका अतिक्रमण हो सकता है।इसके पार जाया जा सकता हैं।और इसके पार जाना ही तीर्थ है।

और जो पार चला गया उसे मै तीर्थानकर कहूँगा।शून्यता की एक मस्ती है,जो मन को शुद्ध करने मे लगेगा उसमे मस्ती नही हो सकती,वो अक्ड़ा ,अक्ड़ा सा रहेगा।सम्भला ,सम्भला सा रहेगा।क्योंकि पारे सा हैै, ये मन।जरा मे छिटक जाये,जरा मे भटक जाये,जरा में सही हो जाये ,जरा मे खराब हो जाये,देर नही लगती है उसको बिगड़ने मे,क्योंकि वो तो बिगड़ने को आतुर ही बैठा है।उसको तो अवसर चाहिए।क्योंकि जो इसांन मन को शुद्ध करने मे लगेगा वो भगौड़ा हो ही जायेगा वो भागेगा,छिपेगा,घूमेगा,जायेगा पहाड़ मे मंदिर मे,एकांत मे, वो भागेगा ढुनिया से क्योंकि दुनिया मे हजार अवसर हैं,हजार चुनौतियाँ हैं और मन हर चुनौती को स्वीकार कर लेता है,वो कहता है जरा इसका मजा तो ले लूं। और तो कोई मजा तो तुमने जाना नही।

एक बात तुमसे कहूँ एक बुनयादी बात,छोटा धन छोड़ा जा सकता है तभी,अगर बड़ा धन मिलता है। छोटे घर छोड़े जा सकते हैं तभी,अगर बड़ा महल मिल जाये।।जिस दिन तुम्हारे जीवन में आंनद की वर्षा होगी,शून्यता का संगीत होगा,यूँ जैसे शून्य ने तुम्हारे गंगा बहा दी,फिर मन तुम्हे नही भटका सकेगा,क्या खाक भटकायेगा,क्योंकि जिसने हीरों को पा लिया वो क्या ककंड पत्थर ढूढ़ेगा,और जब तक कंकड़ पत्थर बिनता है,तब तक उसे बचाने का एक ही उपाय है,जहाँ जहाँ कंकड़ पत्थर हो ,वहाँ मत जाने देना,नहीं तो बिन लेगा।उसे दूर ही रखना ककड़ पत्थर से,उसे ऐसी जगह रखना जहाँ कंकड़ पत्थर रंगीन मिलते ही न हों।वैठा देना किसी गुफा मे रेगिस्तान में,किसी आश्रम मे, बंद कर देना कि कहीं कंकड़ पत्थर न मिल जायें,नही तो फौरन बिन लेगा,ये मेरा हिसाब नही ये कोई बचाब हुआ, क्रांति हुई।मै तो कहता हूँ, हीरे पा लो,फिर कितने ही कंकड़ पत्थर पड़े रहें,तो पड़े रहें, तुम्हे कोई अंत नही पड़ेगा।क्या तुम सोचते हो तुम्हे हीरें मिल जायें। तुम्हारे हाथऔर झोली हीरों से भरी हों और तुम कंकड़ पत्थर उठाओगे “अस्मभव”।।

।।।। — शिवानंद, 28.07.2018

English Translation:
A zero state of mind is to be attained, not purity. If you ask me about it I will tell you that zero state of mind is purity. And where there is mind there will be impurities. What is mind? A mind is full of thoughts, desires and imaginations. It is restlessness in the dilemma of questions about past and future. It is a web of unsolved riddles. How will you purify it? It is not possible but yes it can be encroached. You can go beyond it and going beyond it is like going to a pilgrimage. The one who can go beyond it is the real pilgrim.

A Zero state of mind is the state of joy. The one who will be involved in the purification process will miss out on this joy. He will have to be stubborn and mature. This mind is very playful just like mercury. Happy in a moment and sad in the next, yet flirty in next and serious in the next. It is excited to get spoilt, just waiting for the moment. A person who is in the process of purification will become an escapist. He will escape and run, hide, and wander in the mountains to search lonesomeness. He is running away from this world as this world is full of chances and challenges and this mind accepts every challenge as a game.

Let me tell you a very fundamental thing. Little money can be spared only for big money. Small houses can be left only for the bigger ones. The day when your life will be full of joy, the state of zero will dance in your life. Then your mind won’t wander. Why will it wander for the stones and pebbles when it has got the diamonds. And until he wanders for the stones and pebbles keep him away from it. Don’t let it go near it otherwise he will pick them up. Keep it away from all the stones and pebbles of life. Incarcerate him in some ashram, cave or somewhere, where there are no stones and pebbles.

I advise you to get the diamonds, then no matter how many stones and pebbles be around, it won’t matter to you. Do you think of getting diamonds? Is it possible that your hands and destiny be full of diamonds, yet you pick up the stones and pebbles? “Impossible”.

— Shivananda