Daily Inspirations – 29.July.2018

Daily Inspiration from Babaji in Hindi, followed by the English translation. Sairam.

तुम कैसे खोजोगे,कैसे पता करोगे,कैसे परख करोगे, की कौन गुरू है ,कौन नही।।तुम्हारे पास तरीका ही नही है।। गुरू को परखने का।।तो।। तुम किसी चीज को कैसे खोज सकते हो,तुम बस खोज करो ,तुम बस जानने की लालसा बनाये रखो,तुम जितना ज्यादा “”मै नही जानता” हो जाते हो।।तलाश उतनी ही गहरी हो जाती है।खोजने का मतलब किसी चीज को पाने की कोशिश नही है।।खोजने का अर्थ ये है कि ,आप उसे खोज रहें हैं जिसे आप नही जानते।।अगर आपको खोजना है तो आपको पहले से कोई धारणा नही बनानी चाहिए।आप सबने धारणा बना ली है, भगवान उपर स्वर्ग मै बैठें हैं ,और मै उनकी खोज मे हूँ,ये खोज नही तुम्हारा भ्रम है।खोजने का मतलब है बस खोजना ।और ये तभी सम्भव है जब आपके भीतर”” मैं नही जानता””गहराई में बैठा हुआ हो,अगर तुम्हारे भीतर “मै नही जानता”का खालीपन गहरा हो जाता है,तो सदगुरू तुम तक पहुँच जायेगें।आपको खोजने की जरूरत नही है,क्योंकि आप नही जानते की कैसे खोजा जाये।

अगर तुम अपनी समझ से खोजते हो तो स्वाभिक रूप से तुम ऐसे इंसान को खोजोगे,जिसके साथ तुम सबसे ज्यादा खुद को फ्री महसूस करते हो!देखो अगर तुम दोस्त खोजते हो, किस तरह का दोस्त खोजते हो।क्या तुम ऐसा दोस्त चाहते हो, जो हर दिन तुम्हारे अहम् को ठेस पहुंचाये,तुम ऐसा दोस्त चाहोगे, जो हर दिन तुम्हारे अहम को पोषित करे। अगर कोई तुम्हारे अहम् पर चोट करता है तो वो तुम्हारा दुश्मन बन जाता है। तो अगर तुम गुरू की खोज करते हो तो वो भी इसी तरह की होगी। कोई भी सच्चा गुरु तुम्हारे अहम् को पोषित नही करेगा,और ऐसा गुरू जो तुम्हे दिलासा देता है। तुम्हारे किसी काम का नही है।

लोगों को दिलासा देने मे कुछ भी आधात्यमिक नही है।ये वस एक मनोवैज्ञानिक सांत्वना है।जो तुम्हारा परिवार भी तुमको दे सकता है तुम्हारा कुत्ता भी तुमको दे सकता है।कुते से काफी सुकून मिलता है। वो तुम्हारे लिए गहरे सुकून का स्रोत हो सकते हैं। तुमको दिलासे के लिए भगवान की जरुरत नही है।,तुम दूसरे आयाम की खोज सुकून के लिए नही,बल्कि मुक्त हो जाने के लिए करते हो।

उस हर चीज से मुक्त हो ने के लिए जो तुमअभी हो,और अगर तुम दिलासा पाने के लिए गुरु खोज रहे हो, तो ऐसे बहुत सारे मिल जायेंगे।और अगर मुक्ति पाने के लिए गुरु खोज रहे हो,तो अगर तुम उनसे बात करने बैठें तो तुम खतरा महसूस करने लगते हो,उनसे दूर भागने लगते हो।परंतु फिर भी कहीं न कहीं उनको एक पल के लिए भी नही छोड़ना चाहते,अगर तुम लगातार उनसे खतरा महसूस करतें हैं,,परंतु फिर भी हर उनके साथ होना चाहते हो तो समझ वही तुम्हारे लिए सच्चे गुरु है।जिनके साथ तुम बहुत फ्री महसूस करते हो वो तुम्हारे लिये अच्छे गुरु नही हैं। जिसके साथ तुम हर समय धबराहट भी महसूस करो और दूर भी न जाना चाहो वही गुरु तुम्हारे लिए सदगुरू है।

।।।। — शिवानंद, 29.07.2018

English Translation:
How will you search, how will you find out, how will you figure out who is the Guru and who isn’t? There is no method as such with you for this search. How do you search for something – usually you just keep searching, keep your longing and as long as you think “I don’t know”, it gets done and the search becomes deeper.

To search for something does not mean efforts to possess something. Your search is usually for something about which you do not know/understand much. So, if you want to search for something, you should not have any pre-conceived notions about it. You all have pre-conceived notions regarding God – like God sits up in Heaven, and I am searching for Him, this is not a search/quest, it is your delusion. Searching means a quest without pre-conceived notions, and this is possible only when you deeply believe “I don’t know” and when the emptiness of the ‘I don’t know’ is deep within you, a Sadguru will come to you. And then there really is no need to search because you don’t know how to conduct the search.

If you search for something with your intellect, then automatically you will search for a person with whom you will experience our own free self. Let’s say you are searching for a friend – will you search for a friend who will harm your ego(अहम्) everyday or for a friend who will nurture your ego (अहम्) everyday? When someone hurts youe ego(अहम्), they become your enemies. The same thing happens in the search for a Guru. An authentic or true Guru will never nurture your ego(अहम्), and the Guru who consoles/comforts your ego is of no use at all.

Giving people comfort or consolation is not spirituality, it is more a psychological solace, that your family can give you, even your pet dog can give you. A dog offers a lot of peace too. You don’t need God for giving you comfort or solace.

You don’t search for other dimensions(आयाम ) for the sake of peace, but for attaining liberation, to become liberated from each and every thing that you are now(today). If the purpose of the search for a Guru is limited to attaining peace, you will find a lot of such Gurus. But if the purpose of the search for Guru is for liberation, when you sit down to discuss things with such a Guru, you will experience danger, you will feel like running away from him. But if you still keep meeting him, keep experiencing the danger every time, you will also never want to leave him even for a second, no one wants to leave him, then understand you have found your true Guru! A guru, with whom, you will experience your free self is not a good Guru for you. A Guru with whom you experience fear, and want to run away from, He is your Sadguru!