Daily Inspirations – 31.July.2018

Daily Inspiration from Babaji in Hindi followed by the English translation. Sairam.

तुम कहते हो जिओ “अभी “और यहीं,पर स्वयं को देख कर हमे अभी और यही जीने जैसा नही लगता।।वर्तमान मे जीने के वजाय,भविष्य की कल्पना में जीना ज्यादा सुखद लगता है।तो क्या करें।तो “जीओ”।वैसे ही जीओ।अनुभव बतायेगा, जो सुखद लगता था।वो सुखद है ही नही,तुम्हारे प्रश्न से इतना ही पता चलता है, कि तुम प्रोढ़ नही हो ।कच्चे हो, तुम अभी,अभी जीवन ने तुम्हे पकाया नही है।अभी तुम मिट्टी के कच्चे गडड़े हो ।वर्षा आते ही वह जाओगे।जीवन की आग ने अभी तुम्हे पकाया ही नही!क्योंकि जीवन की आग जिसको पक्का देती है ।उनको ये साफ हो जाता है।क्या साफ हो जाता है।।

यही बात साफ हो जाती है। भविष्य में सुख देखने का अर्थ है, कि वर्तमान में दुख है।इसलिए भविष्य के सपने सुखद मालुम होते हैं।जरा सोचो जो आदमी दिनभर भूखा रहा हैं वो रात को सपने देखता है भोजन के,परंतु जिसने रातभर भोजन किया है वो भी रातभर सपने देखता होगा भोजन के,,जो तुमको मिला है उसके तुम सपने नही देखते,जो तुम्हे  नही मिला है।उसी के ही सपने देखते हो ।वर्तमान तुम्हारा दुख से भरा है इसको भुलाने को,अपने मन को समझाने को,राहत,सांत्वना के लिए,तुम अपनी आंखे भाविष्य मे टीलोलते हो,कल सब ठीक हो जायगा।उस कल की आशा में ,तुम आज के दुख को जेल लेते हो। मंलिज की आशा में रास्ते का कष्ट कष्ट नही लगता,तुम्हे मालूम पड़ता हैै तुम पहुचने के ही करीब हो, हालांकि वो कभी आता ही नही।।

आज, जिसको तुम आज कह रहे हो, वो भी तो कल, कल था। इस आज के लिए भी तुमने सपने देखे थे,वो पूरे नही हुए।ऐसा ही पिछले कल भी हुआ था, और यही आगे भी होगा।अगर तुम्हारा आज सुखपूर्ण नही है।तो दुख पूर्ण आज से है,सुख पूर्ण कल कैसे निकलेगा ,थोड़ा सोचो,आज कही आकाश से थोड़ा आया है।ये तो तुम्हारे भीतर से आया है। तुम्हारा आज अलग है।मेरा आज अलग है,कैलन्डर के दोखे में मत पड़ना,कलेंडर तो तुम्हारा आज भी वही नाम रखता है।मेरा भी वही नाम रखता है।पर आज तुम यहाँ जितने लोग देख रहे हो,उतनेआज हैं।इस पृथ्वी पर जीतने लोग थे, उतने आज हैं।अगर तुम पृथ्वी पर पशु पक्षियोंऔर पौधों को गिनों तो उनकी वही सख्यां है।

कलैण्डर सब झूठ हैं।उससे ऐसा लगता है। एक ही दिन है सबका रविवार तो सबका रविवार ,जरूरी नही किसी की जिंदगी मे सूरज उगा हो तो रविवार,और किसी की जिंदगी मे अंधेरा हो तो कैसा रविवार,आज कहीं आकाश से नही उतरता,समय कहीं बाहर से नही आता है,समय तुम्हारे भीतर से आता है,तुम्ही आज को जी कर कल को पैदा करोगे,तुम्हारे ही गर्भ में निर्मित होता है कल,कल निर्मित हो रहा है आज, इसलिए मै कहता हूं आज और अभी जी लो।इतने खुल के जीअो, इतने आंनद मे जिओ ,की जो तुम्हारे गर्भ मे निर्मित हो रहा है,वो भी रूंपातरित हो जाये,वो तुम्हारे आंनद को पकड़ ले।अगर आज तुम दुख मे जी रहे जो और कल की आशा मे जी रहे हो, सुख की,आशा से पैदा नही होगा कल,कल तो तुमसे पैदा होगा,तुम जैसे जी रहे हो उससे पैदा होगा तुम्हारे अस्तित्व से  पैदा होगा,तुम्हारे सपनों से नही।

समझो एक मां बीमार है,और उसके गर्भ मे एक बेटा है।और शरीर जराजीर्णहैं माँ कितना भी सोचे बच्चा वड़ा स्वस्थ पैदा होगा,बड़ा हस्टपुष्ट पैदा होगा,वेटा तो इसी जीर्ण शरीर से पैदा होगा,मां सपने चाहे कितने भी देखती हो ।इससे कुछ हल नही होगा,इस सपने से वेटा नही पैदा होने वाला,बेटा तो सच्चाई से पैदा होगा, तुम्हारा कल तुम्हारे सपने से पैदा नही होगा, तुम्हारे आज की असलियत से पैदा होगा.,हकीकत से पैदा होगा तुम आज क्या हो अगर तुम नाच रहे हो,तो तुमने आने वाले कल के लिए नाच दे दिया,अगर तुम प्रफुलित हो,तो कल का फूल खिलने लगा है,जिस फूल को कल खिलना है वो आज ही खिलने लगा है।

प्रतिपल तुम अगला पल पैदा कर रहे हो ।प्रतिक्षण अगला क्षण तुम्हारे भीतर पैदा हो रहा है।.यहाँ तुम शृष्ठा हो,तुम अपने समय को खूद पैदा करते हो,इसलिए मै तो कहता हूं आज ही जिओ,पर तुम्हे वर्तमान जीने जैसा नही लगता अगर वर्तमान जीने जैसा नही लगता तो क्ल भी तो वर्तमान बन कर ही सामने आयेगा।फिर वो भी जीने जैसा नही लगेगा,परसों भी वर्तमान ही आयेगा फिर वो भी जीने जैसा नही लगेगा,इसी को तो मैं आत्मघात कहूगाँ,तब तुम आत्महत्या कर रहे हो जी नही रहे हो,जीने का कोई और उपाय नही है,आज ही है औरआज ही जीना पड़ेगा,जीने जैसा लगे या न लगे इससे कोई फर्क नही पड़ता,जीने का कोई और ढंग है ही नहीं,जीना तो यहीं होगा कल के भुलावे मे मत पड़ो,क्ल भुलावे ने बहुतों  को ढुवोया है।

आज जिओ,इस क्षण को खाली ना जाने दो,ये क्षण अवसर है,इसे तुम ऐसे ही मत गवां देना,कुछ बना लो इसका,कुछ रस ले लो इसमे कुछ भोग लो इसमे,कुछ पहचान लो इसे,इसका स्वाद उतेर जाने दो तुम्हारे प्राणों में।ये ऐसा ही न चला जाये,अगर समय ऐसा ही चला जाता है,तो समय को ऐसे ही चले देने की आदत मजबूत होती चली जाती है,फिर धीरे धीरे समय को ग्वांना तुम्हारी प्रकृति बन जाती है,रोको इस क्षण को क्योंकि ये ही तुम्हारा परामात्मा के प्रति धन्यावाद हैै,क्योंकि उसने तुम्हे अवसर दिया है जीवन दिया है।और तुमने उसे ऐसे ही गवा दिया,परमात्मा तुमसे ये नही पूछेगा,कि तुमने कौन कौन सी गलतियां की,गलतियों का वो हिसाब रखता ही नही है,भूल का हिसाब कौन रखता है,परमात्मा तुमसे पूछेगा कि ,तुमको इतने सुख के अवसर दिये तुमने भोगे क्यों नही,एक ही बात है जीवन मे,वो है जीवन के अवसरों को बीना भोगे जाने देना,जब तुम आंनदित हो सकते थे,आंनदित हुये नही,जब तुम गा सकते थे,तब तुमने गाया नही। हमेशा कल पर डालते रहे,हमेशा इस्थिगीत करते रहे,अौर इस्थिगीत करने वाला जीयेगा कब,कैसे जीयेगा ,क्योकि इस्थिगीत करना ही तुम्हारे जीवन की शैली बन जाता है,बच्चे थे तो जवानी पर छोड़ा,जवान हुये तो बुढ़ापे छोड़ा,बुढ़ापे पे आये तो अगले जन्म पे छोड़ते चले जा रहे हो,वो कह रहें हैं,परलोक मे देखेंगे,

ये ही लोक है एक मात्र,ये ही क्षण है,सत्य का ये ही क्षण है,बाकी सब झूठ है,मन का जाल है,पर अगर तुम्हे सब सही लगता है तो ठीक है,तुम्हे अच्छा लगता हो तो मै कौन हूँ बाधा देने वाला,तुम सपने देखो,परंतु तुम जागोगे,रोओगे,पछताओगे,तब तुम पछताओगे कि इतना समय क्यूं बर्वाद किया,पर ध्यान रखना जीवन में जीतना दुख भर लोगे आंसू बहाओगे,उतना ही फिर कठिन हो जाताहै,दुख को रोकना,कभी तुमने ख्याल किया,हंसी तो एक दम रुक जाती है,रोना एकदम नही रुकता,तुम हंस रहे हो एकदम रुक सकते हो,पर आंसू नही रुकते,थमते थमते थमेंगे आंसू,रोना है कुछ हंसी नही,दुख ऐसा सरावोर कर लेता है,दुख ऐसी गहराईयों तक प्रवृष्ट हो जाता है,तुम्हारी जड़ो तक समा जाता है,कि अगर तुम इसको रोकना भी चाहो तो कैसे रोकोगे,थमते थमने थमेगे आंसू,रोना है कुछ आंसू नही,ये कोई मजाक नही है,कि रो लिये और रोक लिये,ये कोई हंसी नही है कि हंस लिये और रोक लिये,हंसी तो तुम्हारी ऊपर ऊपर होती है,जो रुक जाती है,रोना वहुत गहरा  चला जाता है,रोना तुम्हारे जीवन मे सब तरफ बढ़ जाता हैै।

और रोने को तुम रोज रोज संभाल कर ,और जीने को कल पे टालते गये,तो हसेंगे कल,रोयेगें आज,और तुम जो दलिल दे रहे हो,और दलिल है,अपना वर्तमान तो सुखद मालूम नही पड़ता,इसलिए सुखद सपने देखेंगे,सुखद वर्तमान क्यूं नही है,ये पूछो,इसलिए नही है क्योंकि कल भी तुमने सपने देखे थे,आज के,और कल का दिन गंवा दिया,जिसमे आज सुखद हो सकता था,जिसमे आज की आधार शिला रखी जा सकती थी,कल तुमने गवा दिया,इसलिए आज दुखद है।ओर तुम एहि दलिल दे रहे हो, कि हम आज को भी गवायेंगे।क्योकि क्ल का सपना अच्छा मालूम पड़ता हैै,तुम्हारी मर्जी,गणित साफ है,फिर मुससे मत कहना,कि हमे किसी ने बताया नही,तुम्हे ये मौका नही मिलेगा कहने का,ये ध्यान रखना,कि हमे किसी ने चिताया नही,दूसरों को तो ये भी सुविधा है कहने की उनको किसी ने चिताया नही,लेकिन मै तो तुमको रोज चिता रहा हूँ, ।।

।।।। — शिवानंद, 31.07.2018

English Translation:
You say live ‘now’ and ‘here’, but when we see ourselves, it does not seem like we are living here and now. Instead of living in the present, imagining the future seems more gratifying. So what can you do about this? So ‘LIVE’, live like that itself.  Experience will make you understand which is more gratifying.  I am telling you -Living like this is not satisfactory.

Your question shows you are not old, mature yet! You are still raw, the fires of life have not touched you yet. You are still an unbaked mud pot, which will disintegrate when it rains. The fires of life have not touched you yet, because once the fires of life touch you, you will become strong and solid and then, these things will become clear to you.  What things? Things like visualizing happiness in the future means  misery in the present. That is why the dreams of the future seem like they will bring happiness. Ponder this – a person who has been hungry and starving the whole day, will dream of food in the night. A person who has eaten well will also have dreams of food. The food that you get or is easily available, you do not dream of it, you only dream of what you don’t get.

Your present is full of misery, so to make your mind find solace(santvana), you turn your eyes to the future, hoping everything will set itself right. The hope or promise of a better tomorrow helps you bear today’s misery. The difficulties encountered on the road to a better tomorrow or destination, don’t  affect  you for you think you are nearing the destination, yet a better tomorrow never arrives!

What you call ‘today’ was yesterday’s ‘tomorrow’. For this ‘today’ as well, you had many dreams, which remain unfulfilled. This(unhappy today) will repeat tomorrow and in the future as well. If your ‘today’ is a miserable(unhappy) one, how do you expect a happy tomorrow to emerge out of this? This (miserable today) has not fallen from the sky, but has come from deep within you.

Your ‘today’ is different, my today is different.  Don’t fall into the habit of looking at the calendar, for the calendar gives the same name for your today as it does for mine, and also for all the people living on earth today. Yet, there are as many different todays as the number of people living on earth.(No two person’s day is identical). If you count the number of animals and plants , they also have different todays. The calendar is a lie; for from a calendar one feels there is only one same day for everyone. If Sunday, it will be a Sunday for everyone. However, it is not necessary that the Sun has risen in someone’s life for it to be Sunday.  If there is darkness in someone’s life, can it be a Sunday, a day of the Sun?

Today does not arise from the sky, times does not come from outside you, it comes from within you. You live today and create your tomorrow today; tomorrow is created from your womb, your tomorrow is being created today in your womb. That is why I say – Live here and now! Live so openly, with so much joy that the tomorrow being created in your womb today transforms and absorbs your happiness.

If you are living in misery today and are making dreams of a better tomorrow, understand that a happy tomorrow will not be created by mere hope or wish. Tomorrow is created within you, from the way you are living today, it is being created out of that. It is born from your essence not from your dreams!

When a pregnant mother falls ill during the course of pregnancy, and her body is time-worn(unhealthy), despite all the mother’s wishful dreams about a healthy, bouncy baby, the baby is born true to the existing situation, not as per the mother’s dreams. And dreams do not resolve the situation or make it any better, the baby is born as per the current situation of the mother’s health.

Your tomorrow is not created by your dreams, it is created from the truth of today, from today’s reality, from whatever you are today. If you are dancing in joy today, you have given/passed that joy to the coming day. If you are joyous today, your tomorrow will form accordingly. Whatever flower has to blossom tomorrow, it starts opening/forming today itself.

Every second, you are creating the next second inside of you. You are the creator here, you create your own time, that is why I am saying “Live today itself!”, but you don’t like living in the present. And if you don’t like living in the present, the tomorrow you are going to face is your present too. And then you will also not feel like living there. The day after tomorrow will come and you won’t feel like living that too. I call this suicidal, you are not living but committing suicide daily, not living!

There is no other means to live – there is ONLY TODAY and you have to live today, whether you feel like living or not does not make any difference at all. There is no other alternative method or technique – living has to take place now.  And do not be misled/distracted by dreams of tomorrow, this distraction has sunk many!

Live today, do not let this ‘second’ go away empty-handed, this ‘second’ is necessary, do not lose it so easily, idle it just like that. Make something out of it, some pleasure,  some identity with it and let the taste of it seep into your life!

Let it not just go away in vain, for if you let even a second go away, it will become a habit that grows stronger and stronger and wasting time will become your very nature.  So, stop this waste this very second as it is your only way to express gratitude to the All Mighty God, for He has granted you this opportunity, He has given you this life. The All Mighty God will not ask you what all wrongs you have committed, He never keeps an account of this, but He will ask you – I have given you so many ways and chances to be happy, why didn’t you enjoy?  There is only one thing about life and that is letting go of all the opportunities to experience bliss. When you could have experienced joy, you chose not to. When you could sing, you did not, you always put it off for tomorrow, you kept postponing it. And a person who postpones to tomorrow, when will he live, how will he live and postponement becomes the way of life for him, as a child he will postpone to youth, as a youth to old age and as a old person, defer it to the next life or other worlds.

This is the only world, now is the only time, truth is this very second. Everything else is false, the trap of the mind.  But if you feel everything fine and you like it, then who am I to give you sorrow. Go on, keep dreaming. But when you finally wake up, when you cry and start enquiring, then you will repent why you wasted so much time in dreaming.

A word of caution about crying – the more you cry, the more difficult life becomes. Have  you noticed how you can stop laughter easily and all at once, but crying cannot be stopped in an instant. The tears keep coming, coming, coming. Crying is no laughing matter  for grief creates a lake, a lake so deep, it seeps into all your very roots. How will you stop crying, for it keeps on coming, coming, coming? Crying is not a few tears, it is not a joke or a laughing matter. Crying is not like laughter. You laugh a little and stop laughing, laughter is more on the surface. Crying on the other hand, goes very deep indeed and it will spread and increase to all parts of your life.

You are handling tears daily, postponing living to tomorrow and laughter to tomorrow but keeping crying for today, and you are saying that your present is not pleasant, so you are dreaming of pleasant tomorrow. Instead ask – Why is my present joyous? The answer is – because you had dreams yesterday as well of today and you lost the day of yesterday, which could have made today joyous. Yesterday had the foundation stone for a joyous today, but you lost that opportunity and hence you are miserable now, And you are giving this plea today that you will lose today too because you like the dreams of tomorrow.

It is your wish what you do, but from my side I have made things clear.