Why do we chant Hanuman Chalisa?

इस दुनिया में प्रकृति अपने रौद्र रूप धारण करने वाली है।बहुत जल्दी प्रकृति की आपदाऐं शुरू हो जायेंगी।जिनमें भूकम्प,सुनामी बाढ़,बादल फटना जैसी आपदाऐ होगी।26अगस्त भगवान अपनी करूणा का द्वार खोलेंगे।फिर धीरे धीरे सब ठीक होना शुरु होगा।लेकिन तब तक इंसान की जीवनशैली का रूप काफी हद तक बदल जायेगा।आप के हाथ बस प्रार्थना हैै। लोगों पास पड़ा काल धन उनके विनाश का कारण बनेगा।विरोधी देश विद्रोह करेंगे मै तुमको अपनी मुठ्ठी मे बंद करके रखा हूँ।रक्षा करूँगा।इसलिए हर रविवार को हम मिलकर वीडियो काल मे आयेगें और 11बार हनुमान चालीसा गायेंगे।11लोग तय कर लें कौन कौन करेगा।एक तो मै करूँगा और हम काल कल जल्दी शुरु करेंगे।जो गा लिया वो आनलाईन रह सकता है या आऊट हो सकता है।तो हर 11लोग कल के लिए नाम देदें।ये भी एक तरीका है जिससे 100 मे 9% फर्क होगा।सबका साथ जरूरी है क्योंकि प्रकृति अपना निर्णय बदलने को तैयार नही।बाबाजी

Why do we chant Hanuman Chalisa? What does one derive from it? The authorship of Hanuman Chalisa is attributed to Tulsidas. He mentions his name in the last verse of the hymn. It is said in the 39th verse of the Hanuman Chalisa that whoever chants it with full devotion to Hanuman, will have Hanuman’s grace. Among Hindus worldwide, it is a very popular belief that chanting the Chalisa invokes Hanuman’s divine intervention in grave problems.

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Chiranjeevis (immortal)

ashvatthaama balirvyaaso hanumaanshch vibheeshanah, krpah parashuramashch saptaite chiranjeevinah, saptaitaan smarennityam maarkandeyamathaashtamam jeeved‌varshashatan, sopi sarvavyaadhivivarjitah |

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः, कृपः परशुरमश्च सप्तैते चिरंजीविनः, सप्तैतान् स्मरेन्नित्यम् मार्कंडेयमथाष्टमम् जीवेद्‌वर्षशतं, सोऽपि सर्वव्याधिविवर्जितः |

अश्र्वत्थामा, बली राजा, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम

शास्तों व्दारा ये सात चिरंजीवी या अमर माने गये हैं।
कुछ विद्वान ऋषि मार्कंडेय को भी चिरंजीवी मानते हैं।

Ashwatthama, King Bali, Veda Vyasa, Hanuman, Vibheeshana, Kripacharya, Parashuram

According to the Shastras, these seven personalities are considered as Chiranjeevis – the immortal ones. Some scholars consider Rishi Markandeya also as a Chiranjeevi.

Why this pandemic – Babaji answers…

On Namah Shambave ????

Here is an important message from Babaji that I am placing before all of you. I hope and wish that all of you will mull over it and do something about it.

I was sitting with Babaji yesterday evening, in Swami’s mandir. During our conversations, Babaji prompted me to ask of Him any questions that I wanted to. I thought for a while and asked Him, “can you not provide a cure to mankind, for this illness that has afflicted people all over the world, as they are unable to find any cure for it themselves?”

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The Char Dham Yatra – Rishikesh, days 1 to 4(in Hindi)

ॐ नमः शिवाय
हिमालय के चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री। ये चारों धामों की महिमा, महत्व के बारें मे मै आप सबको बताऊंगा।

कल से इस यात्रा का आंनद कथा के रुप में शुरु करुँगा। हमारी यात्रा कल ऋषिकेश से शुरू होगी। मै आपको इन धामों की शक्ति महिमा का विस्तार मे वर्णन करूँगा।जय विश्व।।बाबाजी।।

ऊं नमः शिवाय
मैं बहुत ही खुश हूं की हमें ये एक साथ चार धाम यात्रा कथा का अवसर मिला।हमारा भारत देश हमेशा तो आलौकिक शक्तियों और धार्मिक स्थलों से भरा है।गली- गली कण-कण में जहाँ मंदिर आरती पूजन का आंनद बहता रहता है।उनमें से हिमालय के चार धामों की महिमा का आंनद मै सबको सुनाऊंगा। मै आपके साथ आप मेरे साथ मिलकर इस यात्रा कथा का आंनद लेगें।मै इस यात्रा मे कुछ प्रमुख स्थानों के बारे मे बताऊँगा,मेरी ईच्छा है आप इस यात्रा का पूर्ण आंनद लें।ये पूरी यात्रा पन्द्रह से बीस दिन मे पूर्ण होगी।मै हर दिन हर जगह के बारे में थोड़ा ही लिखूगाँ।ताकी आपका धैर्य और आंनद बना रहे।।इस यात्रा से जुड़ाँ कोई भी सवाल होगा तो आप निसकोंच पूछ सकते है चलिऐ तो हम चलते हैं।एक आद्यात्मिक सफर में।।
बोलो बाबा की जय।।
जगदम्बे मात की जय।।

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Char Dham Yatra – Rishikesh to Chamba, Day 5 (Hindi)

पाँचवा दिन-ऋषिकेश से चम्बा

ऋषिकेश मे वक्त बीताने के बाद माँ गंगा,आश्रम,योग,राफटिग,मंदिर दर्शन,पूजन के बाद अब हम ऋषिकेश से चम्बा जायेंगे। जो की पहाड़ो मे बसा एक सुंदर गाँव है।

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Char Dham Yatra – Rishikesh to Yamunotri, Day 6 (in Hindi)

छठा दिन—ऋषिकेश से यमुनोत्री की ओर

वैसे तो ऋषिकेश से यमुनोत्री जाते वक्त, चम्बा जाने की जरूरत नही होती है।ऋषिकेश से दूसरे मार्गों से यमुनोत्री पहुँचा जाता है।ऋषिकेश से देहरादून, मसूरी होकर जा सकते है।पर यात्रा के दौरान मैने सोचा आपको इस सुंदर जगह का भी आनंद लेने दूँ।और बागेश्वर मंदिर भी चम्बा मे नही आता ये कुमायुं गढ़वाल अर्थात उतराखण्ड के दूसरी जगह मे आता है।पर आपको इस जगह का महत्व और आंनद प्राप्त हो इसलिए मैने कल इन दो जगहों का विवरण दिया आप सबको जरूर इन दो जगहों का आंनद आया होगा।हमको यमुनोत्री के लिए इन दोनो ही जगह जाने की जरूरत नही पड़ेगी।पर यात्रा कथा मे इन दोनो जगह का भी आंनद मिला।।तो कल की हमारी यात्रा ऋषिकेश से चम्बा दर्शन की थी।तो चम्बा मे बैठ कर हमने बागेश्वर महादेव के मंदिर और उसके पीछे के इतिहास को जाना।आप सबको इस धाम का दर्शन भी प्राप्त होगा।अब हम चम्बा से लौट कर ऋषिकेश वापिस आते है। तो आज ऋषिकेश से माँ यमुना के दर्शन की यात्रा शुरु करते हैं।ऋषिकेश से देहरादून होते हुये हम मसूरी ओर जोएंगे।

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Char Dham Yatra – Towards Yamunotri, Day 7 (in Hindi)

सातवां दिन-यमुनोत्री की ओर

लाखामंडल मे शिव मंदिर और ऐतिहासिक भवानी गुफा दर्शन पाकर।प्रकृति का आंनद और मन मे जोश और भोले बाबा के नाम के जयकारों के साथ आगे की यात्रा की ओर बढेगे।लाखामंडल से हम हिमालय के एक और सुंदर स्थान पर आ पहुंचे हैं।जिसका नाम मे बड़कोट आईए जानते है।इस सुंदर गांव की कुछ खास बातें।

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Char Dham Yatra – Yamunotri, Day 8 (in Hindi)

आँठवा दिन–यमुनोत्री दर्शन

पहाड़ो के रास्ते का आंनद लेते।और हर जगह का महत्व जानते हुऐ।हम कल आ पहुँचे।जानकचट्टी।।ये वो स्थान है।जहाँ से यात्री आगे की छह किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं।क्योंकि आगे गाड़ी नही जा सकती।यहाँ से आगे धोड़ा,पालकी,पीठू,के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।जो कि थोड़ा आंनदमय,थोड़ा थकान भरा रास्ता है।चलो आगे बढ़ते हैं।

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Char Dham Yatra – Heritage of Yamunotri, Day 9 (in Hindi)

नवमाँ दिन–माँ यमुनाजी का इतिहास

कल हम यमुना जी पहुँचे।उनके मंदिर के दर्शन किऐ।मंदिर नित्य पूजा और वहाँ की परम्परा के बारे मे जाना।आज हम माँ यमुना जी के बारे मे जानते है।

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Char Dham Yatra – Towards Gangotri, Day 10 (in Hindi)

दसवाँ दिन-गंगोत्री की ओर

कल हमने माँ यमुनाजी का दर्शन पाया।माँ के पावन जलधारा मे स्नान पाकर जाने अनजाने मे हुऐ पापों की क्षमा पाकर आज हम गंगोत्री की ओर बढ़ेगे।मोक्षदायिनी गंगा माँ अपने पास आने वाले हर भक्त को हर पाप से मुक्त करती हैै।चलो अब चलते हैै।माँ गंगा के दर्शन पाने के लिए ।जय बोलो गंगा माई की—–जय।

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Char Dham Yatra – Towards Gangotri, Day 11 (in Hindi)

ग्यारहवाँ दिन — गंगोत्री की ओर

परम पावन,मनमोहक रमनीय ,जहाँ प्रकृति अपनी छटा बिखेरती हुई,और भगीरथी की कल कल करती आवाज,मदिरों से आती घंटो और मंत्रों पूजन की आवाज ऐसे सुंदर शहर उतरकाशी मे आप सबका स्वागत हैै।ऐसे सुंदर स्थान की महिमा को आज हम सुनेंगे।कल दिन भर सफर के बाद रात्री विश्राम के बाद सुबह जल्दी उठ गयें हैं सब।मदिरों से भरी काशी मे आज हम उतरकाशी के विश्वनाथ मंदिर का दर्शन करेंगे।तो अब सुबह का नाश्ता हो गया हो तो सब एक जगह इकट्ठा हो जायें और जयकार बोलें विश्वनाथ जी की।चलो आगे बढ़ते हैं बोले बाबा की जय।।महाशक्ति मात की जय।

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Char Dham Yatra – Towards Gangotri, Day 12 (in Hindi)

वारहवाँ दिन—गंगोत्री की ओर

उतरकाशी मे विश्वनाथ और शक्ति मंदिर का दर्शन हुआ।और उनसे जुड़ी कुछ पौराणिक बातों को जाना।अब हम आगे की ओर बढ़ते हैं।

धरती पर स्वर्ग कह सकते हैं।ऐसा सुंदर है।वो स्थान जहाँ पहुँच कर शायद स्वर्ग क्या है।उसका ज्ञान मिलता है।तो चलिए आज हम चलेंगे।गंगोत्री से पहले आने वाला एक सुंदर गाँव हरसिल।।

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Char Dham Yatra – Towards Gangotri, Day 13(in Hindi)

तेरहवाँ दिन–गंगोत्री की ओर

धरती पर जिसे स्वर्ग का दर्जा प्राप्त हो।जहाँ पर्वत नदियां नाले,आसान छुती हिमालय की चोटियाँ,और घने जंगल हर तरफ जहाँ एक ही शब्द गुंज रहा है।सुंदरता,।।ऐसे सुंदर स्थान हरसिल मे कल हम पहुँचे।प्रकृति के आंनद मे सभी डूब चुके हैं।जल्दी जल्दी सब तैयार हो जाओ।आज हम हरसिल के आस पास गाँव का भ्रमण करेंगे।प्रकृति के सौदंर्य से पूर्ण इन स्थानों के दर्शन से ही,जीने का अर्थ बदल जाता है।कुछ पल जहाँ जीवन दुखों का घर लगता है।वहीं इन जगहों का दर्शन पाकर जीवन मे हर जगह सुख आंनद नजर आने लगता है सच कहूँ तो जीने के मायने बदल जाते हैं ऐसी प्राणशक्ति है प्रकृति मे।आगे बढ़ते हैं।

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Char Dham Yatra – Towards Gangotri, Day 14 (in Hindi)

चौदहवां दिन-गंगोत्री की ओर।

कल मुखवा गाँव से शाम रहते हम हरसिल लौट आये। हरसिल में वक्त बिताने के बाद,वहाँ की सौंदर्यता को मन मे बसाने के बाद आज हम गंगोत्री धाम की ओर बढ़ेगे।ये प्रकृति का सौदंर्य ऐसा है।कि किसी को भी आगे बढ़ने की ईच्छा नही हो रही।नदी पहाड़ और गांव का सादा जीवन ये सबने मिलकर मन को बस मे कर लिया।बैसे तो यहाँ आस पास बहुत सारी ट्रेकिग हैं ट्रेकिगं के शोैकीन यहाँ अच्छा समय बिता सकते हैं।पर समय के साथ हमे आगे बढ़ना होगा। 2दिन हरसिल की वादियों मे समय बिताने के बाद हर कोई इसका दिवाना हो गया।अब जल्दी से अपनी गड़ियों के बैठ जाओ।आज गंगोत्री धाम का दर्शन पाऐंगे।जयकार के साथ आगे बढतें हैै।जय बोलो गंगा माई की जय।

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Char Dham Yatra – Gangotri Darshan, Day15 (in Hindi)

पन्द्रहवाँ दिन—गंगोत्री दर्शन

कल हम गंगोत्री पहुँच गये तो वहाँ की जानकारी और जानते हैं। पतित पावनी हर हर स्वर करती भगीरथी के किनारे मंदिर का दर्शन आज करेंगे।और मंदिर की परम्परा को जानेगें।तो अब शुरू करते हैं।

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