Love can never be a master! This means, we feel that when we love someone, then we start having our rights, and start controlling the life of the person in front, as if we are the master of his life, but that is not our love, that is attachment.Love liberates, attachment binds. That's why love is not the master, the one who is the master is attachment. Love sets you free.
प्रेम कभी मलिक नही हो सकता! इसका मतलब ये हुआ, हमको लगता है जब हम किसी से प्रेम करते हैं, तो हम अपना अधिकार करने लगते हैं, और सामने वाले के जीवन को कंट्रोल करने लगते है, जैसे की उसके जीवन के मलिक हैं, लेकिन वो हमारा प्रेम नहीं, हमारा मोह है. प्रेम तो मुक़्त करता है, मोह बांध कर रखता है॥ इसलिए प्रेम मलिक नहीं होता जो मलिक होता है वो मोह है। प्रेम तो आज़ाद करता है॥
प्यार कभी मलिक नहीं हो सकता! प्रेम दूसरे को आज़ादी देता है॥ प्रेम एक बिना शर्त उपहार है!प्रेम कोई सौदा नहीं॥जय विश्व॥ भोले बाबा॥
अगर तुम्हारा अहंकार ही सेवा से भरता है,तो सेवा भी शोषण है! आत्मज्ञान के पहले कोई व्यक्ति परोपकारी नही हो सकता। क्योंकि सव्यम् को जाने बिना इतनी बड़ी क्रांति हो ही नहीं सकती॥जय विश्व॥ भोले बाबा॥
बिना आत्मज्ञान सेवा करते करते दुनिया के अंदर एक अहंकार भी जन्म लेता है॥ और जब अहंकार जन्म लेता है तब सेवा भी अर्थहीन हो जाती है॥ और आत्मज्ञान का सरल उतर है॥ होश॥ जब आप होश में हैं उसी को आत्मज्ञान कहा जाता है॥ कब क्या क्यों कैसे हर सवाल से ऊपर जब आप हो जाते हैं, और केवल अपनी आत्मा को अनुभव करते है॥
परमात्मा की करिगरी तो देखो, हम सबको बना कर ख़ुद ग़ायब हो गया! आँखें बनाई देखने के लिए, पर वो दिखता बंद आँखों से हैं॥ जय विश्व॥ भोले बाबा॥
मनुष्य को शिक्षा की ज़रूरत है! और शिक्षा का एक ही अर्थ है,की हम जीवन की कला सीख सके॥जय विश्व॥ भोले बाबा॥
प्रेम कठिन है, एक तरह से असंभव॥ प्रेम का अर्थ है अपने को अपनी चेतना से निकाल बाहर करना,और उसकी जगह, अपने अहंकार की जगह दूसरे को स्थापित करना! प्रेम का अर्थ है अपनी जगह दूसरे को स्थापित करना॥ मानो अब तुम हो ही नहीं, केवल दूसरा ही तुम्हारे भीतर है॥ सच्चे प्रेम में तुम बचते ही नहीं हो,तुम्हारी सोच और तुम्हारे भीतर केवल तुम अपने प्रेमी को ही महसूस करते हो, फिर चाहे ये प्रेम किसी से भी हो, यही प्रेम जब परमात्मा से हो जाता है तो विरह वेदना बन जाता है॥ जय विश्व॥ भोले बाबा॥
El amor es difícil, de alguna manera imposible. ¡Amor significa sacarte a ti mismo de tu conciencia y, en su lugar, en la ubicación de tu ego estableces a otro! Amar significa que pones a otro en tu lugar. Como si ahora tú ya no existieras, únicamente el otro está dentro de ti. En el verdadero amor tú no sobrevives, piensas y sientes dentro de ti solo a tu amante, no importa quién recibe este amor, cuando este amor es hacia Dios entonces la separación se convierte en dolor. Jai Vishwa (Victoria del Mundo) Bhole Baba.