Being a pious and good person, if a devotee prays to God and primarily due to his engagement in good deeds and positive balance that stays with him due to his good actions, God takes his bad karma and removes it. In fact God removes the bad karma and sometimes God takes it upon Himself. Take for instance, you have accrued bad actions (karma), however due to your strong , unflinching faith and prayers, God takes this bad karma upon Himself or He makes it alright. What kind of difficulties does God take upon the most?
Daily Inspiration from Babaji in Hindi, followed by the English and Spanish translation. Sairam.
दूसरे को भूखा मरना अगर गलत है तो खुद को भूखा मरना को सही समझदारी है।दूसरे को सताना अगर हिंसा है तो खुद को सताना अहिंसा कैसे हो सकती है।किसको सताते हो इससे क्या फर्क पड़ता है, जो हिम्मत वर है।वो दूसरों को सताता है। अौर कमजोर खूद को सताता है। क्योंकि दूसरे को सताने मे एक डर है दूसरा बदला लेगा। खूद को सताने में खतरा नही है। कौन बदला लेगा। कमजोर हमेशा अपने को सताते हैं। वो आत्महिंसक हो जाता है। और ताकतवर परहिंस्क हो जाता है।
Daily Inspiration from Babaji in Hindi, followed by the English translation. Sairam.
मानो मत” अगर जानना है तो ,और जानने का पहला कदम है’ मानने से मुक्त हो जाना। अगर तुम मुझ से मेरा गणित पूछोगे तो, तुम्हे थोड़ा उल्टा लगेगा।क्योंकि मेरी भी मजबूरी है।”क्योंकि मै सत्य को वैसा ही कहने पे मजबूर हूँ” जैसा वो है।।अगर तुम सच में नास्तिक हो जाओ ,तो कभी तुम आस्तिक भी हो सकते हो।।नास्तिकता और आस्तिकता में कोई विरोध नही है। नास्तिकता सीढ़ी है। प्राथिमक सीढ़ी है, आस्तिक होने के लिए। अगर मेरा बस चले तो मै हर बच्चे को नास्तिक बनाऊं।।और हर बच्चे को सवाल दूँ जिगायासा दूँ ,खोज करने की वजह दूँ , हर बच्चे के मन में तीव्र प्रेरणा दूँ ,”कि तु जानना “मानना मत।। और जब तक तुम न जान लो, “ठहरना मत”बुद्ध ने जाना तो, तो ही पहुंचे ।।नानक ऐशु जिसने भी जाना,तब वो पहुंचे।।उन सवके पहुंचने से तेरा पहुंचना नही होगा। अगर तू जानेगा तो ही तू पहुचेगा। उससे पहले चाहिए कि तुम्हारे चित की स्लेट खाली हो जाये! “पोछं डालो जो भी दूसरों ने लिख दिया है!” धो लो स्लेट को, साफ कर दो उसको। कोरी कर लो तुम्हारी किताब।।क्योंकि कोरी किताबों पर खिलता है वह फूल,कोरी किताबों पर ही आती है वो किरण,,कोरी किताबों पर ही होता है वो विस्फोट। कोरी किताब माने निद्रोष चित। मान्यताओं और विश्वासों से मुक्त ।फिर तुम जान सकोगे “फिर ही “तुम जान सकोगे।भक्ति तो खो गई क्योकिं भगवान का नाम ही लोग भूल गये। भगवान से पेहचान ही न रही। भगवान के और तुम्हारे बीच में पंडित पुजारी न जाने कितने लोग खड़े हो गये ।भगवानअौर तुम्हारे बीच इतनी भीड़ खड़ी है।तुम्हे तो बस लोगों की पीठें दिखाई पड़ रही हैं।
Daily Inspiration from Babaji in Hindi, followed by the English translation. Sairam.
एक प्रश्न ….. “मै कौन हूँ “मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है। मुझ से पूछते हो।। क्या तुम्हे पता नही, की तुम कौन हो।और दूसरे से पूछ कर जो जबाव तुमको मिलेगा। क्या वो किसी काम आऐगा।मै तुमको कोई भी उतर दे दूँ।। वो तुम्हारा उत्तर न बन सकेगा।तुम को अपना उतर खुद खोजना होगा। प्रश्न तुम्हारा है , उत्तर भी तुम्हारा ही। तुम्हारे प्रश्न को हल करेगा । मै तो तुमसे बोल दूँ, की तुम तो साक्षात ब्रह्म हो ,ईश्वर का स्वरूप हो,पर इस से क्या होगा,मै तो बोल दूंगा तुम तो आत्मा हो। शाश्वत ,अमर हो इस से क्या होगा ,इस तरह के उत्तर तो तुमने सुने हैं- बहुत,इस तरह के उतर तो तुमको भी याद हैं।कंठस्त हैं,ऐसे उतर तो तुम भी दुसरों को दे देते हो।तुम्हारे बच्चे तुमसे से ये सवाल पूछें तो तुम ,ये उत्तर दे दोगे। की तुम ,आत्मा हो,, ईश्वर का रूप हो।पर दुसरों के उतर काम नही आयेंगे कम से कम इस बारे में की” मै कौन हूँ”।
Daily Inspiration from Babaji in Hindi, followed by the English translation. Sairam.
शून्यता लानी है। शुद्धता नही।मुझसे अगर पूछो तो, मै कहूगां शून्यता ही एक मात्र शुद्धता है।और जहाँ तक मन हैं वहाँ तक कहीं न कहीं अशुद्धता रहेगी! मन है क्या, मन यानी भरा हुआ, मन है क्या विचार,वासना,कल्पना। अतीत भविष्य, बेचैनी, विडम्बना, प्रश्नों का ढेर ।वेवुझ पहेलियाँ, “मन है क्या” सब तरह के झंझालो का नाम “मन” है।इसको कैसे विशुद्ध करोगे। पर “हाँ” इसका अतिक्रमण हो सकता है।इसके पार जाया जा सकता हैं।और इसके पार जाना ही तीर्थ है। और जो पार चला गया उसे मै तीर्थानकर कहूँगा।शून्यता की एक मस्ती है,जो मन को शुद्ध करने मे लगेगा उसमे मस्ती नही हो सकती,वो अक्ड़ा ,अक्ड़ा सा रहेगा।सम्भला ,सम्भला सा रहेगा।क्योंकि पारे सा हैै, ये मन।जरा मे छिटक जाये,जरा मे भटक जाये,जरा में सही हो जाये ,जरा मे खराब हो जाये,देर नही लगती है उसको बिगड़ने मे,क्योंकि वो तो बिगड़ने को आतुर ही बैठा है।उसको तो अवसर चाहिए।क्योंकि जो इसांन मन को शुद्ध करने मे लगेगा वो भगौड़ा हो ही जायेगा वो भागेगा,छिपेगा,घूमेगा,जायेगा पहाड़ मे मंदिर मे,एकांत मे, वो भागेगा ढुनिया से क्योंकि दुनिया मे हजार अवसर हैं,हजार चुनौतियाँ हैं और मन हर चुनौती को स्वीकार कर लेता है,वो कहता है जरा इसका मजा तो ले लूं। और तो कोई मजा तो तुमने जाना नही।